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सीधी। अपनों को उपकृत करने के फेर में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग जनता और शासन की बजाय सिर्फ अपनों के प्रति जिम्मेदार रह जाते हैं और सभी नियमों को शिथिल करते हुए कुछ भी कर गुजरते हैं कुछ इसी तरह का 4 साल पुराना मामला ग्राम पंचायत कोडार से सामने आया है जहां तत्कालीन सचिव ने अपने भाई के झोले में चल रही फर्म से लाखों रुपए का पंप खरीद डाला।
प्राप्त जानकारी के अनुसार आदिवासी बाहुल्य विकासखंड क्षेत्र कुसमी के ग्राम पंचायत कोडार में वर्ष 2020 में शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभाल रहे सचिव रामभद्र शुक्ला ने साइ एक्सपर्ट टेक्नोलॉजी नाम की एक तथाकथित फर्म से जिसके कर्ताधर्ता उनके मौसेरे भाई जीवेन्द्र मिश्रा है , की तथाकथित फर्म के बिल क्रमांक 232 दिनांक 12 जनवरी 2020 में पंप सेट, पाइप केबल और अन्य सामग्री के नाम पर ईपीओ क्रमांक 2347 674 दिनांक 23 अप्रैल 2020 को 90000 रुपए का भुगतान कर दिया। गौरतलब है कि इसी तथा कथित फर्म साइ एक्सपर्ट टेक्नोलॉजी से सचिव रामभद्र शुक्ला ने पहले भी विभिन्न पंचायतों में रहते हुए लोहा, सीमेंट ,रेत ,गिट्टी और ईटा के नाम पर 36 लाख 99 हजार 945 रुपए का भुगतान कर चुके हैं। यह दुकान भी ऐसी है जिसका पता सिर्फ रामभद्र शुक्ला को मालूम है और जहां वह दूसरों को बताते हैं वहां ऐसी कोई दुकान नहीं है तब लगता है कि शायद उन्हें भी यह नहीं मालूम है कि आखिर यह दुकान है कहां ? बहरहाल हम बात कर रहे थे पंप सेट खरीदी की तो इसके लिए मध्य प्रदेश शासन ने एक नियम बनाया है। मध्य प्रदेश शासन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्रालय भोपाल द्वारा जारी ” पत्र क्रमांक/67/2018/22/पॅ-1 भोपाल दिनांक 16/02/2018 मैं कहां गया है कि पेयजल हेतु उपयोग होने वाले सिंगल फेस मोटर पीएचई द्वारा उपलब्ध कराई जाती है किंतु अति आवश्यक होने की स्थिति में यदि संबंध जनपद पंचायत के अनुविभागीय अधिकारी (पीएचई ) सिंगल फेस मोटर उपलब्ध नहीं होने का प्रमाण पत्र देते हैं तब ही ग्राम पंचायतें पीएचई द्वारा निर्धारित मानक की सिंगल फेस मोटर क्रय कर सकेंगे।” यहां पर शासन के नियम का सरेआम शिथिल करते हुए एक फर्जी फर्म से जो कल तक लोहा सीमेंट और गिट्टी रेत ईटा के बिल काटा करती थी अब पंप का भी बिल काटने लगी और सचिव महोदय खरीदने लगे फिर शासन के नियम कायदों की परवाह किसे है और मजेदार बात तो यह है कि यह तथाकथित झोलाछाप ही सही साॅइ एक्सपर्ट टेक्नोलॉजी ना तो लोहा सीमेंट रेत गिट्टी और ईटा बेचने के लिए रजिस्टर्ड है और ना ही पंप बेचने के लिए यह केवल पेंट और वार्निश बेचने के लिए रजिस्टर्ड है। बहरहाल कहावत वही है कि “जब सैंया भए कोतवाल तो फिर डर काहे का ।” मगर नियम कायदों का पालन करने की जरूरत तो है ही क्योंकि इसी से तो सारी व्यवस्था चल रही है वरना जंगल राज कायम हो जाएगा ।
सीधी। अपनों को उपकृत करने के फेर में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग जनता और शासन की बजाय सिर्फ अपनों के प्रति जिम्मेदार रह जाते हैं और सभी नियमों को शिथिल करते हुए कुछ भी कर गुजरते हैं कुछ इसी तरह का 4 साल पुराना मामला ग्राम पंचायत कोडार से सामने आया है जहां तत्कालीन सचिव ने अपने भाई के झोले में चल रही फर्म से लाखों रुपए का पंप खरीद डाला।




